आखिर हो ही गया..

कुछ ख्याल ठंडी हवा से आते है..
दिल को छु के मन ताझा़ करते है..
तो कुछ रूह को छु के पार हो जाते है..
एेसा ही कुछ ख्याल था बारीश का जो मेरी झेहेनमें हमेशासें ही था..
बहुत अज़ीब बात है ये बारीश मुझे कभी पसंद ही नहीं थी..

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बचपन सें लेके आज तक खाँसा प्यार नहीं था उससे..
स्कूल के लिए तैयार होने तक उसका नामोंनिशान नहीं होता था..और जैसेंही स्कूल जाने के लिए बाहर कदम रखो़..
ये बरसना शुरू..
पता नहीं क्या दुश्मनी थी उसकी मेरे साथ..
चलो बारीश का भी समझ आता है..पर ये हवा भी क्यों इतनी तेज़ होती है?
फिर उस तेज़ हवा में छाते को भी दम तोड़ना ही था..
फिर तो हमारा भिगना तेय़ ही था..
हे भगवान मै ही क्यों..
साल दर साल एेंसेही होता आया है..
कमबख्त् उससे मोहोंब्बत क्या दोस्ती भी ना कर सकीं मै..
हमेशा एक सवाल था मेरे मन में..क्यों ये लोगोंको बारीश इतना भातीं हैं..
एेंसा नहीं है की कभी मैंने चाहा नहीं उससे मोहोंब्बत करना.पर डर था कहीं उसकी मोहोंब्बतमें डुब ना जाऊ मैं..

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सोचा नहीं था मेरा डर कभी हकिक़त बन जाएगा..
उसके आने की आह़ट से मैं कभी खुशी नहीं होती थी.
पर अब बेचैन सीं होती हूँ..
वो काली घटाँ देखकर..बिजली की आवाज़ सुनकर..
अब भी डर तो जाती हूँ..
पर उसीं वक्त एक पेहेली हल्कीं सी बुँद जब बादलों के पार होकर मेरे जिस्म को छुती है तब पेहेले प्यार का एहसास क्या होता है..समझ़ही जाती हूँ मैं..

आगे की दास्ताँ भी कुछ कमालही थी..
उस तेज़ हवा नें भी ठान लिया था..इस प्यार को गहेरा करना था..
मानो कोई साजिश सीं थी..
उस ठंडी तेज़ हवाें को वोही करना था जो वो उसनें पेहेलें भी किया था..आखिर मेरे छातें ने फिरसें दम तोड़ना ही था😜😂( I really need to buy atleast one branded umbrella)
चिड़ती थी मैं पेहेले..अब बेफिकर होकर भिगना चाहती हूँ..
मिठ्ठी की सौंधी सौंधी खुशबू अपने रूह में बसाना चाहती हूँ..
वो कहेते है ना मोहोब्बत की नहीं जाती बस हो जाती हैं..
आखिर इस खुशनूमाँ मौसम से मोहोब्बत कर बैठी मैं..

अस्तित्व…

अस्तित्व निर्माण करण्याची फारचं चढा़ओढ़ आहे..आपलं वेगळेपणं कसं दाखवता येईल यासाठीचे फार प्रयत्न करत असतो आपणं..
ह्या अथांग समुद्ररूपी जगात आपण कुठे आहोत याची जाणीव आपलं अस्तित्व करून देत असतं..

ह्या अथांग समुद्रात..
तू कोण..तुझं अस्तित्व ते कायं..

त्या खळखळणा-या लाटाचा नादही नाहीस..तर मग..
तू कोण..तुझं अस्तित्व ते कायं..

त्या वाहणा-या वा-याचा कोमल शितल स्पर्शही नाहीस..तर मग..
तू कोण..तुझं अस्तित्व ते कायं..

त्या शंख शिंपल्यासमान मोहक सुंदरही नाहीस..तर मग..
तू कोण..तुझं अस्तित्व ते कायं..

त्या अखंड आभाळात विहार करणा-या पक्ष्याचा मधुर स्वरही नाहीस..तर मग..
तू कोण..तुझं अस्तित्व ते कायं..

त्या विस्तारलेल्या वाळूतील एक कण आहेस तू..
अगदी इवलीसी.. सौम्य..क्षणभंगूर..
मुठीत मावतेस पणं अगदी सरकऩ निसटूनही जातेस..
तुझ्या अस्तित्वाचा सुगावा लागत नाही..पण तुझे अस्तित्व कोणी झुगारूही शकत नाही..
त्या समुद्र व किना-यास पूर्ण करणारी आहेस तू..
हो पूर्णत्वास नेणारी आहेस तू..

समझ़ना भूल ही गयें..

कहते है समझ़दारी उम्र के साथ आ ही जाती है..
तो इसी चक्कर में हमने सबको समझ़नेंं की कोशिश की..
पर लोग हमें समझ़ना भूल ही गयें..

life

उनकी हर गलतीयों को समझा़ है हमने..
पर वों हमारी गलतीया़ समझ़ना भूल ही गयें..

उनकी हर नादानीयाें को हँसी में उडाया है हमने..
पर वो हमारी नादानीया़ समझ़ना भूल ही गयें..

उनकी हर बेफ़िकरीयों को जा़ना है हमने..
पर वों हमारी बेफ़िकरीया़ समझ़ना भूल ही गयें..

उनकी हर खुशी को अपनाया़ है हमने..
पर वों हमारी खुशीया़ समझ़ना भूल ही गयें..

Wajah..

Wajah me na bandhana apne pyaar ko..
Kyunki..PYAAR ko kabhi wajah ki jarurt hi nahi hoti..

ti

Wajah nahi thi tumse baat karne ki..
Ab wajah dhoondti hu tumse baat karne ki..

Wajah nahi thi tumse milne ki..
Ab wajah ki jarurt nahi tumse milne ki..

Wajah nahi thi tumse Pyaar karne ki..
Ab wajah tum hi ho Pyaar ki..

 

 

हो हवायं मला..

मला तो स्पर्श हवाय तुझा..
अलगद..हळूवार..
ते एकटक पाहत राहणं..
हवयं मला..
ते डोळ्यात बघंत जग विसरून जाणं..
हवयं मला..
ते शब्द नको त्या शांततेतला गंध..
हवायं मला..
त्या वाळूवर आपलं हातात हात घेऊन चालणं..
हवयं मला..
त्या मावळणा-या सुर्याला शांत बघतं बसणं..
हवयं मला..
त्या चांदण्या रात्री तुझ्या कुशीत निजणं..
हवयं मला..
प्रत्येक क्षण हवायं तुझ्या सोबत..तुझ्यासाठी..
आपल्यासाठी..हो हवायं मला..

Kya pata bhi hai tujhe?

Jab kabhi tera naam sunti hu
Dhadkan tham si jati hai
Aaj bhi dil me halchul si hoti hai
Kya pata bhi hai tujhe?

Jab bhi tere sine se lagti hu
Aaj bhi palke num si hoti hai
Tab bhi teri dhankne sunna pasand karti hu
Kya pata bhi hai tujhe?

Jab bhi tere sath hoti hu
Wo lamha wohi tham jaye aisa lagta hai
Aaj bhi tere aankho me dekhke pura din bita sakti hu
Kya pata bhi hai tujhe?

Jab bhi raste ke mod se gujarti hu
Aaj bhi teri ek zalak dekhne ke liye
Khuda se dua karti hu
Tabhi tera vaha se gujarna Meri dua kabul hone ka aihsaas dilata hai
Kya pata bhi hai tujhe?

ती..

ओठांवरती अबोल ती..मनातूनी बडबडी..
जगापासून अलिप्त..पण स्वत:च्या जगात गुंतलेली ती.क्षणात हास्य क्षणात अश्रू ही ती..

फक्त क्षणीक सुखासाठी का ती?